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यहाँ एक नई नज़्म प्रस्तुत है, जिसका शीर्षक है "इश्क़ की सरहदें":

 इश्क़ की सरहदें

इश्क़ की सरहदों को हमने यूं पार किया,
हर ख़्वाब में तेरा ही दीदार किया।
तेरी राहों में बिछते रहे दर्द के फूल,
फिर भी दिल ने तुझसे प्यार किया।

तू दूर था मगर दिल के पास था,
हर लम्हा तेरी यादों का एहसास था।
चाहत की राहें कांटों से भरी रहीं,
फिर भी तुझसे मिलने का अरमान ख़ास था।

इश्क़ ने सिखाया हमको जीने का सलीका,
तेरे बिना हर लम्हा था सूना और फीका।
वो वक़्त भी आया जब दिल टूट गया,
मगर फिर भी तुझसे मिलने का था रास्ता मीठा।

अब वक़्त ने बदल दी हैं राहें हमारी,
पर इश्क़ की कहानी अब भी है जारी।
तेरी यादों के उजालों में हम खो जाते हैं,
और मोहब्बत की सरहदों को फिर से पार कर जाते हैं।