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इश्क़ की राहें और दर्द का सफ़र"

 इश्क़ की राहें और दर्द का सफ़र"


तेरी आँखों में जो देखा, वो जहाँ था नया,
इश्क़ की वो सहर, जिसमें ख़्वाब था बसा।
मगर ये राहें, हर मोड़ पे थक गईं,
दर्द के सफ़र में मोहब्बत खो गई।

तू मेरे साथ था, पर ये दुनिया अलग थी,

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हर कदम पे ज़िन्दगी के मायने बदल गए।
चाहा था तुझसे सुकून, मिला पर बेबसी,
तेरे हुस्न में डूबे, पर दिल से कुछ कह ना सके।

रातों की तन्हाई अब रास नहीं आती,
तेरी यादों से जलती है ये चांदनी भी।
इश्क़ की राहें हैं, पर मंज़िल अब दूर है,
दिल की ये उलझनें, कैसे कोई दूर करे?

बस अब यही दुआ है, ये सफ़र थमे नहीं,
मोहब्बत के दर्द में भी चैन मिले कहीं।
राहें बदलें न, और दिल ना बिछड़ जाए,
इश्क़ की राहें और दर्द का सफ़र, साथ चलते जाएं।  


आप इस नज़्म को अपनी पसंद अनुसार और भी बदल सकते हैं, लेकिन यह मोहब्बत और दर्द की गहराइयों को छूने की कोशिश है।