इश्क़ की राहों में अंधेरे"
इश्क़ की राहों में अंधेरे, फिर भी हम चलते रहे,
जिंदगी की उन गलियों में, जहाँ सब कुछ बदलते रहे।
तेरी आँखों में खोया था, जब तक तुम पास थे,
अब वो रास्ते वीरान हैं, जैसे बिछड़े अरमान थे।
मोहब्बत का सफ़र आसान नहीं, ये मैंने तब जाना,
जब दर्द ने मेरी रूह को, सच्चा मतलब था समझाना।
तेरे बिना ये आलम भी, एक सूनापन सा लगता है,
वस्ल की ख्वाहिश छोड़ दी, अब हर लम्हा थमता है।
पर इश्क़ की आदत ऐसी है, कि हम फिर भी जी लेते हैं,
दिल के टुकड़ों को समेट कर, फिर ख्वाब बुन लेते हैं।
और भी दुःख हैं इस दुनिया में, मोहब्बत के सिवा,
फिर भी तेरी यादें छू जाती हैं, हर ख़ुशी के सिवा।
इश्क़ की राहों में अंधेरे, फिर भी हम चलते रहे,
जिंदगी की उन गलियों में, जहाँ सब कुछ बदलते रहे।
तेरी आँखों में खोया था, जब तक तुम पास थे,
अब वो रास्ते वीरान हैं, जैसे बिछड़े अरमान थे।
मोहब्बत का सफ़र आसान नहीं, ये मैंने तब जाना,
जब दर्द ने मेरी रूह को, सच्चा मतलब था समझाना।
तेरे बिना ये आलम भी, एक सूनापन सा लगता है,
वस्ल की ख्वाहिश छोड़ दी, अब हर लम्हा थमता है।
पर इश्क़ की आदत ऐसी है, कि हम फिर भी जी लेते हैं,
दिल के टुकड़ों को समेट कर, फिर ख्वाब बुन लेते हैं।
और भी दुःख हैं इस दुनिया में, मोहब्बत के सिवा,
फिर भी तेरी यादें छू जाती हैं, हर ख़ुशी के सिवा।