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"दर्द-ए-मोहब्बत"

 तेरे हुस्न की वो पहली झलक याद है,

जिसने दिल में बसा दी एक दुनिया नई।
आँखों में तेरी वो चमक याद है,
जिसने राहों को दी थी रोशनी वही।

पर अब वो मोहब्बत कहाँ रह गई,
वो रातों की बातें कहाँ खो गईं।
तेरे साथ के वो ख्वाब अधूरे रहे,
अब तक दिल के कोनों में छुपे हुए।

मोहब्बत से बढ़कर भी हैं दर्द यहाँ,
जहाँ हर साँस में बिखरी तन्हाईयां।
तेरे ग़म से ही अब वाकिफ़ हूँ मैं,
पर ज़िन्दगी से शिकायत नहीं है अब।

और भी हैं सफर, और भी हैं फसाने,
जहाँ मोहब्बत की मंज़िल से आगे बढ़ जाने।💗💘💘💖💔
इसलिए अब तुझसे वही पहली मोहब्बत नहीं मांगता,
क्योंकि इस दिल ने अब जीना सीख लिया है।

यह नज़्म मोहब्बत की गहराई और उसके बाद की ज़िन्दगी के संघर्ष को बयान करती है।