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इश्क़ का सफर

 इश्क़ का सफर है, कुछ दर्द से भरा

हर गली, हर मोड़ पे, कोई ख़्वाब अधूरा पड़ा।
तेरी आँखों में दिखता था जहां का नूर

अब वो भी लगता है जैसे कोई झूठा सुर।

तेरी मोहब्बत का साया था, मेरे दिल पे छाया था,
मगर अब समझा, ये फकत एक तमाशा था।
रातें थीं कभी जो तेरे नाम के हसीन ख्वाबों से,
अब वहीं सहर है दुखों की सैलाबों से।
तेरी मोहब्बत के सिवा और भी दर्द हैं जहाँ,
किसे बताऊँ ये किस्सा, अब और हैरानियां।
वो हाथ जो पकड़ने को थे तुझे,
अब झुके हैं इस दुनिया के सितम सहने को।

मेरा दिल अब भी तेरा है, मगर हालात अलग हैं,
इश्क़ के इस सफर में, बहुत से दर्द संग हैं।
न मांग अब मुझसे वही पहली मोहब्बत,
मेरे महबूब, अब वक्त ने बदल दी है हकीकत।