रंग और धुंध
रंगीन शामों की हर एक हसरत में,
सपनों की खुशबू बसी है, ये बेवजह नहीं।
हर लम्हा तेरे साथ बिताना,
जैसे दिल को चुराना, ये बेवजह नहीं।
तेरी हँसी की हसरत, तेरे इंतज़ार की धुंध,
दूर से देखने का अहसास, ये बेवजह नहीं।
हर दिन तुम्हारी यादों की आदत,
हर रात तुम्हारी ख्वाहिश, ये बेवजह नहीं।
तुझसे मिलने की तलब, तेरे साथ की ख्वाहिश,
खुशियों का समंदर, ये बेवजह नहीं।
तेरे बिना हर एक लम्हा अधूरा लगता है,
तेरे बिना ये ज़िंदगी, ये बेवजह नहीं।
तेरे मोहब्बत की राह पर,
हर क़दम पर एक नई धुंध का सामना है।
तेरे बिना मेरा हर अहसास,
रंग और धुंध में खोया, ये बेवजह नहीं।